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स्ट्रेस से छुटकारा: मंत्र-मुद्रा और ध्यान के द्वारा (Relieve Stress: Through Mantra-Mudra And Meditation)

स्ट्रेस यानी तनाव का संबंध मन-मस्तिष्क से जुड़ी भावना है. कभी काम का, कभी रिश्तों का, तो कभी सेहत का या औरकिसी बात का तनाव हो सकता है. जब यह तनाव हद से ज़्यादा बढ़ जाता है, तो कई अन्य बीमारियों का करण बन सकताहै, लेकिन आप निराश ना हों क्योंकि योग विज्ञान, मंत्र-मुद्रा विज्ञान व ध्यान आपकी इस तनाव से मुक्ति में बहुत मदद करसकता है. भारत में दबे पांव पैर पसार रहा है स्ट्रेस आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 89% भारत के लोग स्ट्रेस का अनुभव करते हैं. यह आँकड़े चौंकाने वाले हैं और इनमेंसे भी अधिकांश ऐसे हैं जो एक्सपर्ट की मदद नहीं लेना चाहते क्योंकि वो ऐसा करने से हिचकिचाते या घबराते हैं. काम वपैसा ही इनके तनाव का सबसे बड़ा करण होता है. स्टडी में पाया गया है कि हर 10 में से 9 व्यक्ति स्ट्रेस का शिकार है. Who ने भी आगाह किया हाई कि अन्य देशों के मुक़ाबले भारत में स्ट्रेस बहुत अधिक है और यह चिंता का विषय है. ऐसे में ज़रूरी है कि हम स्ट्रेस को बेहतर तरीक़े से मैनेज करें, जिसके लिए मंत्र-मुद्रा व ध्यान का उपाय सर्वोत्तम है. मंत्र-शक्ति मंत्र दरअसल साउंड एनर्जी ही हैं जिनकी अपनी निश्चित फ़्रीक्वन्सी होती है. यही वजह है कि मंत्र पूर्णतः वैज्ञानिक आधारपर आपको स्वस्थ करते हैं. जब हम उनका जाप करते हैं तो शरीर में वायब्रेशन पैदा होता है जिससे अंगों में संतुलन आताहै, ज़हरीले तत्व बाहर निकलते हैं, प्राण शक्ति उत्पन्न होती है और हम बेहतर स्वास्थ्य की ओर बढ़ते हैं. तनाव से मुक्ति के लिए मंत्र है- ॐ शोकविनाशीभ्याम् नमः और मुद्रा है- हाकिनी मुद्रा. ॐ शोकविनाशीभ्याम् नम: अद्भुत मंत्र है. यह आपको शोक से बाहर कर देगा. मंत्र के साथ मुद्रा लगाकर ध्यान तीसरे नेत्रपर लगाएं. अधिकतम लाभ के लिए रोज़ाना सुबह और शाम कम से कम 15 मिनट से 20 मिनट तक इस ध्यान विधि मेंअपने आपको तल्लीन कर दें. हर श्‍वास भीतर आते हुए आपके लिए मंत्र शक्ति को जागृत करते हुए आपके तनावों कोबाहर फेंक देगा. मुद्रा विज्ञान मुद्रा हाथों का योग है. हमारी पांच उँगलियाँ पंच तत्वों का प्रतीक हैं और जब मुद्रा द्वारा इन्हें आपस में स्पर्श करवाया जाताहै और इन पर प्रेशर पड़ता है तो सम्बंधित तत्व संतुलन की अवस्था में आने लगते हैं. हाकिनी मुद्रा का लाभ यह मस्तिष्क की कार्य क्षमता को बढ़ाती है. स्मरण शक्ति का विकास करती है. मस्तिष्क को शांत करके चिंता व तनावमुक्त करती है. सोचने-समझने की शक्ति को बढ़ाती है. श्वास लेने की शक्ति को बेहतर करके मस्तिष्क तक ऑक्सीजन को बेहतर तरीक़े से पहुँचती है. यही वजह है कि विद्यार्थी जनों के लिए इस मुद्रा को काफ़ी लाभकारी माना जाता है. मेडिटेशन ही है बेस्ट मेडिकेशन मेडिटेशन यानी ध्यान. मन से एकाकार होने की क्रिया है मेडिटेशन. शोध बताते हैं कि ध्यान की अवस्था में हमारा मस्तिष्कअल्फ़ा स्टेट में पहुंच जाता है और हैपी हॉर्मोन्स का रिसाव बढ़ने लगता है. ध्यान में गहरी श्वास के ज़रिए शरीर के चक्र कोजागृत करके संतुलन की अवस्था में लाया है. सम्बंधित ग्लैंड्स ऐक्टिवेट होकर हार्मोन्स का रिसाव संतुलित तरीक़े से करनेलगते हैं और ज़हरीले तत्व बाहर निकलने लगते हैं. स्ट्रेस के लिए ध्यान विज्ञान तनाव से मुक्ति के लिए आपको अपना ध्यान तीसरे नेत्र पे लगाना होगा. दोनों भौहों के बीच स्थित आज्ञा चक्र को तीसरानेत्र कहते हैं और इसके जागृत होते ही बहुत सी सोई शक्तियाँ जाग जाती हैं. यह मन और बुद्धि के मिलन का स्थान है. आज्ञा चक्र स्पष्टता और बुद्धि का केंद्र होता है और ज़ाहिर है जब यह जागृत हो जाता हाई तो सारे तनाव ख़ुद ब ख़ुद दूर होजाते हैं. अगर आप भी मंत्र-मुद्रा और ध्यान विज्ञान की ख़ास तकनीकों के बारे में जानना चाहते हैं तो ट्राई करें वैदिक हीलिंग मंत्रऐप, जिसमें 48 बीमारियों से संबंधित 48 मंत्रों व मुद्राओं के साथ-साथ 48 मेडिटेशन टेक्नीक यानी ध्यान के तरीक़ों के भीआपको मिलेंगे. मंत्र-मुद्रा-ध्यान विज्ञान की इस प्राचीन विद्या का लाभ उठाकर स्वस्थ-निरोगी जीवन पा सकते हैं. वैदिक हीलिंग मंत्रा ऐप से पाएं हेल्दी लाइफ, ज़रूर ट्राई करें 14 दिनों का फ़्री ट्रायल वैदिक हीलिंग मंत्रा ऐप एंड्रॉयड और आइओएस दोनों के लिए उपलब्ध है, न स़िर्फ आप स्वयं इसे डाउनलोड करें, बल्किअपने मित्रों व क़रीबियों को भी इस ऐप के बारे में बताएं, इसे शेयर करें, ताकि स्वस्थ समाज के निर्माण में आपका भीयोगदान रहे. यह एक तरह से समाज सेवा ही है, क्योंकि आप दूसरों को भी स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा दे रहे हैं. […]

एसिडिटी से छुटकारा: मंत्र-मुद्रा और ध्यान के द्वारा (Meditation Therapy For Acidity)

आजकल की बिज़ी लाइफस्टाइल में ना खाने का ठिकाना है और ना सोने का. हमने अपनी जीवन शैली ही ऐसी बना ली हैकि पाचन संबंधी समस्याएं होना आम बात है और इसी का नतीजा है एसिडिटी. एसिडिटी एक धीमा ज़हर एसिडिटी आपके रोज़ के क्रिया कलापों में काफ़ी बाधा उत्पन्न कर सकती है. अगर इसे समय रहते ठीक नहीं किया गयातो यह अल्सर का रूप भी धारण कर सकती है. तनाव भी है एक प्रमुख कारण कभी प्रोफेशनल लाइफ़ को लेकर तो कभी पर्सनल रिश्तों की वजह से हम अक्सर स्ट्रेस में रहते हैं. यह स्ट्रेस हमारीजठराग्नि को बेहद प्रभावित करता है और पाचन में गड़बड़ी को जन्म देता है. लेकिन आप घबराएं नहीं. बस, थोड़ा-सासमय निकालकर मंत्र-मुद्रा व ध्यान विज्ञान का सहारा लें, जिससे अपने आप संतुलन स्थापित होने लगेगा और आप स्वस्थव ऊर्जावान हो जाएंगे. मंत्रों की शक्ति मंत्र पूर्णतः वैज्ञानिक आधार पर आपको स्वस्थ करते हैं, क्योंकि मंत्र दरअसल साउंड एनर्जी ही हैं जिनकी अपनी निश्चितफ़्रीक्वन्सी होती है. जब हम उनका जाप करते हैं तो शरीर में वायब्रेशन पैदा होता है जिससे अंगों में संतुलन आता है, ज़हरीले तत्व बाहर निकलते हैं, प्राण शक्ति उत्पन्न होती है और हम बेहतर स्वास्थ्य की ओर बढ़ते हैं. एसिडिटी के लिए मंत्र है ॐ अग्नि देवाय नम: और मुद्रा है समान मुद्रा.

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स्वस्थ रहने का संपूर्ण विज्ञान


अच्छी सेहत : ॥सोहम॥

मुद्रा: ज्ञान मुद्रा

अपनी सुविधानुसार रोज़ इस मंत्र का जाप करें. वैसे सुबह इस मंत्र को 15-20 मिनट जाप करने से जल्दी लाभ होता है. श्‍वास लेते समय सो कहें और श्‍वास बाहर छोड़ते समय हम.

तनाव व डिप्रेशन : ॥ ॐ शोक विनाशीभ्याम् नमः ॥

मुद्रा: हाकिनी मुद्रा

अपनी सुविधानुसार मंत्र का जाप करें. बेहतर परिणाम के लिए रोज़ाना सूर्योदय से पहले उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके 25-30 मिनट तक जाप करें.

डायबिटीज़ : ॥ ॐ अग्नि देवाय नमः ॥

मुद्रा: समान मुद्रा

अपनी सुविधानुसार मंत्र का जाप करें. बेहतर परिणाम के लिए सूर्योदय से पहले 20 मिनट रोज़ाना इसका जाप करें.

मोटापा : ॥ॐ वरुणाय नमः॥

मुद्रा: सूर्य मुद्रा

अपनी सुविधानुसार मुद्रा के साथ मंत्रोच्चार करें. बेहतर लाभ के लिए दिन के समय, सूर्य की मौजूदगी में या फिर सूर्योदय से पहले खाली पेट, स्नान के बाद जाप करें. 15 मिनट तक जाप करें, मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें.

रक्तचाप : ॥ॐ भवानी पांडुरंगा॥

मुद्रा: लिंग मुद्रा

अपनी सुविधानुसार मंत्र का मुद्रा के साथ जाप करें. बेहतर लाभ के लिए रोज़ 15 मिनट सुबह और 15 मिनट शाम सूर्यास्त से पहले इसका जाप करें. इसे खुली हवा या खिड़की के सामने न करें. कमरे में सामान्य तापमान में करें.

पाचन तंत्र : ॥ रं ॥

मुद्रा: समान मुद्रा

अपनी सुविधानुसार मंत्र का मुद्रा के साथ जाप करें. यदि रोज़ सुबह सूर्योदय से पहले 15 मिनट तक उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके जाप करेंगे, तो बेहतर लाभ मिलेगा. आंखें बंद और मन शांत रखें.

गहरी नींद : ॥ॐ अगस्ती शयीना:॥

मुद्रा: ज्ञान मुद्रा

श्‍वास-प्रश्‍वास के साथ सोते समय इसका जाप करें. मन-मस्तिष्क को शांत रखें.

लंबी आयु : ॥ ओम त्रयंबकं यजामहे, सुगंधिम् पुष्टिवर्धनम् उर्वारूकमिव बंधनान्, मृत्योर्मोक्षीयमामृतात्॥

मुद्रा: प्राण मुद्रा

शुरुआत में हल्के स्वर में जाप करें, बाद में मन ही मन जाप करें. अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं, लेकिन रोज़ सूर्योदय से 96 मिनट पहले यानी ब्रह्म मुहूर्त में और शाम को सूर्यास्त से पहले जाप करेंगे, तो बेहतर परिणाम मिलेंगे.

मस्तिष्क एवं फेफड़े संबंधी बीमारी : ॥ॐ श्री गणेशाय नम:॥

मुद्रा: प्राण मुद्रा

अपनी सुविधानुसार करें. बेहतर लाभ के लिए रोज़ सुबह 15 मिनट मन ही मन जाप करें.

कब्ज़ व गैस : ॥ ॐ हं हनुमंतये नमः ॥

मुद्रा: अपान वायु मुद्रा

अपनी सुविधानुसार मुद्रा के साथ मंत्र का जाप करें. बेहतर परिणाम के लिए सूर्योदय से पहले, 2 ग्लास गुनगुना पानी पीकर 15-20 मिनट तक जाप करें.

माइग्रेन : ॥ॐ नम: शिवाय॥

मुद्रा: अपान वायु मुद्रा या फिर महासिर मुद्रा

रोज़ 15 मिनट तक अपनी सुविधानुसार जाप करें.

इंफर्टिलिटी : ॥ ॐ काम देवाय नमः ॥

मुद्रा: लिंग मुद्रा + अग्निसार क्रिया

अपनी सुविधानुसार मुद्रा के साथ मंत्र का जाप करें. बेहतर लाभ के लिए रोज़ ब्रह्म मुहूर्त में 5 राउंड्स कपल (पति-पत्नी) खाली पेट मुद्रा के साथ इसका जाप करें.


अनुभव करें, फिर विश्‍वास करें

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