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अध्यात्म और विज्ञान

दोनों हैं एक-दूसरे के पूरक

Mudra

अधिकतर लोग ये समझते हैं कि अध्यात्म और विज्ञान का आपस में कोई संबंध नहीं, लेकिन सच ये है कि ये दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं. हिंदू धर्म की लगभग सभी आध्यात्मिक व धार्मिक मान्यताओं के पीछे वैज्ञानिक रहस्य छुपे हैं. ऐसा इसलिए है कि लोग विज्ञान से ज़्यादा धर्म व अध्यात्म में विश्‍वास करते हैं. गुरु ओमानंदजी इसी विषय पर प्रकाश डालेंगे, ताकि लोग अध्यात्म में छिपे वैज्ञानिक रहस्य को जान सकें और स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर हो सकें.


Dr. Om anand जिस तरह बच्चे को अच्छी आदतें सिखाने के लिए हम उसे तरह-तरह के तर्क देते हैं, ऐसे ही कई तर्क इन वैज्ञानिक बातों को धर्म के माध्यम से समझाने के लिए दिए गए हैं, ताकि लोग इनका पालन कर जीवन को बेहतर बना सकें. यानी आप चाहे अध्यात्म की राह चलें या विज्ञान की, दोनों आपको फ़ायदा ही पहुंचाएंगे.




अध्यात्म और विज्ञान का संबंध

सरल शब्दों में कहें, तो विज्ञान अपने शोध से आध्यात्मिक सच्चाइयों की खोज करता है और आध्यात्मिक मान्यताओं के पीछे वैज्ञानिक रहस्य छुपे होते हैं. दोनों
एक ही बात कहते हैं, बस कहने का तरीका अलग-अलग है.

विज्ञान

वैज्ञानिक खोज के पीछे छुपा अध्यात्म

अगर हम वैज्ञानिक खोज की बात करें, तो अधिकतर वैज्ञानिकों का लक्ष्य यह पता लगाना होता है कि ब्रह्मांड क्या है, उसकी शक्ति कितनी है, यह सृष्टि कैसे बनी, मानव कैसे बने आदि. इसी तरह अध्यात्म भी ब्रह्मांड की शक्ति को स्वीकारता है और मंत्र व श्‍लोकों द्वारा उसका वर्णन करता है. हम सब भी कहीं न कहीं ये बात स्वीकार करते हैं कि कोई परम शक्ति है, जो इस संसार का संचालन कर रही है. कई वैज्ञानिकों ने भी यह माना है कि उनकी खोज के पीछे आध्यात्मिक प्रेरणा या दिव्य शक्ति भी काम कर रही थी. सापेक्षता का सिद्धांत खोजने के बाद अल्बर्ट आईंस्टीन ने कहा था कि उनकी वैज्ञानिक खोजों के पीछे सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति ब्रह्मांड का धार्मिक अनुभव है. यानी वैज्ञानिक खोजों में भी अध्यात्म छुपा है और ये बात वैज्ञानिक भी स्वीकारते हैं.


ॐ

ॐ का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

यदि हम बीज मंत्र ॐ की बात करें, तो ॐ का उच्चारण बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है. इसे ही सभी धर्मों और शास्त्रों का स्रोत माना जाता है, इसीलिए अनादिकाल से साधक ॐ के प्रति अगाध श्रद्धा रखते आए हैं. यही कारण है कि हर शुभकार्य करने से पहले ॐ का उच्चारण किया जाता है. इसी तरह ॐ मंत्र का वैज्ञानिक पहलू भी उतना महत्वपूर्ण है. वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारे सिर की खोपड़ी में स्थित मस्तिष्क में कई अंग तथा दिमाग योगासन व
व्यायाम द्वारा खिंचाव में नहीं लाए जा सकते, इसलिए ॐ का उच्चारण उपयोगी है. इससे दिमाग के दोनों अर्द्धगोल प्रभावित होते हैं, जिससे कंपन और तरंग मस्तिष्क में लाकर कैल्शियम कार्बोनेट का जमाव दूर करते हैं. इस प्रकार ॐ के उच्चारण से दिमाग़ को स्वस्थ व शांत रखा जा सकता है.


मेडिकल साइंस और अध्यात्म

मेडिकल साइंस भी ये बात मानता है कि मन का हमारे शरीर पर गहरा प्रभाव होता है. यदि मन ठीक नहीं है, तो उसका असर शरीर पर बीमारियों के रूप में होने लगता है. इसीलिए मेडिकल साइंस इलाज के लिए स़िर्फ दवाइयों को ही काफ़ी नहीं मानता, ख़ासकर तनाव संबंधी बीमारियों को दूर करने के लिए दवाइयों के साथ ही योग व मेडिटेशन की सलाह भी दी जाती है. रिसर्च द्वारा यह बात साबित हुई है कि किसी बड़ी बीमारी या ऑपरेशन के बाद जो लोग मेडिटेशन करते
हैं या धार्मिक स्थलों में समय बिताते हैं, वे उन लोगों के मुकाबले जल्दी स्वस्थ होते हैं, जो ऐसा नहीं करते. यानी मेडिकल साइंस और अध्यात्म दोनों हमारे शरीर
में हीलिंग का काम करते हैं.


अध्यात्म और विज्ञान से जुड़ी कुछ ज़रूरी बातें

  • अध्यात्म हमें वैज्ञानिक तरीके से सोचने की प्रेरणा देता है और विज्ञान हमें अध्यात्म के रहस्य बताता है. अध्यात्म वैदिक धर्मग्रंथों में विश्‍वास करता है और विज्ञान का आधार है सही तर्क और नई खोज. दोनों ही अपनी बात ठोस आधार पर करते हैं.
  • विज्ञान बाहरी जगत की सच्चाई की खोज का माध्यम है और अध्यात्म अंतर्मन को जानने-समझने का ज़रिया. दोनों ही मार्ग हमें ज्ञान की राह पर ले जाते हैं और हमारे जीवन को बेहतर बनाते हैं. हां, दोनों के रास्ते ज़रूर अलग हैं. विज्ञान भौतिक रास्ते से जाता है और अध्यात्म अभौतिक के रास्ते से.

    • अध्यात्म और विज्ञान दोनों सृजन के मूलमंत्र से जुड़े हैं. दोनों बाहरी जगत और अंतरात्मा को जोड़ने काम काम करते हैं.


  • अध्यात्म हमें मन से जोड़ता है और विज्ञान ये बताता है कि बाहरी जगत का हमारे मन और शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है.
  • अध्यात्म और विज्ञान दोनों ही सत्य की खोज करते हैं, हमें प्रकृति से जोड़ते हैं, मानवता से जोड़ते हैं और दोनों का उद्देश्य हमारे जीवन को बेहतर बनाना है.
  • अध्यात्म और विज्ञान दोनों समाज के कल्याण के लिए काम करते हैं. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए यदि वैज्ञानिक खोजों की ज़रूरत होती है, तो मन को स्वस्थ और सुंदर बनाने के लिए अध्यात्म के नियमों का पालन ज़रूरी होता है. अध्यात्म और विज्ञान मिलकर स्वस्थ और सुंदर समाज का निर्माण करते हैं.
  • अध्यात्म और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक तभी हो सकते हैं, जब अध्यात्म को अंधविश्‍वास से न जोड़ा जाए और विज्ञान का प्रयोग विनाश के लिए न हो. अध्यात्म और विज्ञान द्वारा जनहित में की गई हर खोज उन्हें एक-दूसरे के करीब ले आती है.

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