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कितना ज़रूरी है मंत्रों का सही उच्चारण?

Dr. Om anandऐसा माना जाता है गुरु द्वारा दिया गया मंत्र ज़्यादा फलदायी होता है. ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि गुरु हमें न स़िर्फ मंत्र का सही महत्व बताते हैं, बल्कि उसका सही अर्थ और सही उच्चारण भी बताते हैं. मंत्र चाहे कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, उसका प्रभाव तभी दिखाई देता है, जब उसका उच्चारण सही हो, उसे सही माहौल और सही तरीके से उच्चारित किया जाए. अतः किसी भी शुभ कार्य या किसी भी सिद्धि के लिए मंत्र का उच्चारण करते समय सबसे पहले मंत्र का अर्थ समझें और उसे सही माहौल में, सही तरी़के से उच्चारित करें, तभी आपको उसका उचित लाभ मिलेगा.




मंत्र हमारी ज़िंदगी बदल सकते हैं, लेकिन…

हिंदू धर्म के सभी मंत्र संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं और संस्कृत को दुनिया की सबसे पुरानी भाषा माना जाता है इसीलिए मंत्रों का महत्व और भी बढ़ जाता है. हर मंत्र की अपनी एक अलग शक्ति है और अपना एक इतिहास. हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव कल्याण हेतु धार्मिक ग्रंथों में अनेक महत्वपूर्ण मंत्रों का उल्लेख किया है, जिनका अपने दैनिक जीवन में उपयोग करके हम उनका सही लाभ पा सकते हैं. लेकिन मंत्र पढ़ते समय आपको इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि आप वो मंत्र किसलिए पढ़ रहे हैं, उसका सही उच्चारण क्या है, क्योंकि मंत्रों का सही फल उसे पढ़ते हुए उत्पन्न हुई ध्वनि पर  निर्भर करता है. अतः मंत्र पढ़ लेना ही काफ़ी नहीं, उसे पढ़ने का तरीका और उचित माहौल भी उतना ही ज़रूरी है. यदि हम ॐ की ही बात करें, तो ये स़िर्फ एक शब्द नहीं है, इसकी ध्वनि में इतनी ताक़त है कि इसके उच्चारण मात्र से हम स्वस्थ और पवित्र महसूस करते हैं. इसीलिए लगभग सभी मंत्रों के आरंभ और अंत में ॐ को जोड़ा जाता है. ॐ जिस मंत्र के साथ जुड़ जाता है, उस मंत्र की शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है.


मंत्रों का धार्मिक तथा वैज्ञानिक महत्व

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जब भी हम किसी धार्मिक स्थान पर जाते हैं, तो हमें असीम सुख और शांति का अनुभव होता है. साथ ही ये विश्‍वास भी होता है कि अब हम यहां पर आ गए हैं, तो हमारी समस्या का समाधान अवश्य हो जाएगा. जानते हैं ऐसा क्यों होता है? ऐसा वहां पर उच्चारित होने वाले मंत्रों के कारण होता है. मंत्रों में इतनी शक्ति होती है कि इन्हें सुनने मात्र से भी मनुष्य के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं. उसे अपनी  शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक, सामाजिक समस्याओं से लड़ने की ताक़त मिलती है. जहां तक मंत्रों के वैज्ञानिक महत्व की बात है, तो मंत्र साउंड यानी ध्वनि होते हैं और विज्ञान कहता है कि ध्वनि ऊर्जा के सिवा कुछ नहीं है. यानी मंत्र का सीधा मतलब है- एनर्जी.

 

  • मंत्र जप करने का अर्थ है शक्ति के विभिन्न स्तर को महसूस करना. नासा के वैज्ञानिकों ने भी यह माना है कि मंत्रों का हमारे मन-मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है.

कैसे पाएं मंत्रों का सही लाभ?

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मंत्रों के उच्चारण से रोगों से मुक्ति मिलती है. मंत्रों की शक्ति से बीमारियों से लड़नेवाले

हार्मोंस क्रियाशील होते हैं और बीमारी उत्पन्न करनेवाले हार्मोंस कम होते हैं. यदि आपको इस बात की जानकारी हो कि किस रोग के लिए कौन सा मंत्र पढ़ा जाना चाहिए, तो मंत्रों की शक्ति से आप कई रोगों से छुटकारा पा सकते हैं. शास्त्रों के अनुसार, मंत्रों का सही उच्चारण बहुत ज़रूरी है. यदि किसी कारणवश आप मंत्र बोल या पढ़ नहीं सकते, तो मंत्र सुनें, क्योंकि मंत्र सुनने से भी उनका लाभ मिलता है.

क्या है मंत्र पढ़ने की सही विधि?

मंत्र साउंड यानी ध्वनि होते हैं इसलिए मंत्रों का सही उच्चारण करने के लिए उनकी ध्वनि पर विशेष रूप से ध्यान देना बेहद ज़रूरी होता है.   साथ ही शब्दों की गति और लंबाई पर भी ध्यान देना ज़रूरी है, तभी आप मंत्र का सही उच्चारण कर पाएंगे. मंत्रों का लाभ पाने के लिए किस मंत्र को कितनी बार पढ़ना है, इसकी जानकारी होनी भी ज़रूरी है.

जानें मंत्रों के लाभ

सही माहौल में, सही तरी़के से, सही उच्चारण के साथ पढ़े गए मंत्रों के कई लाभ हैं. आइए, हम भी इनका लाभ लें.


  • मंत्रों के उच्चारण से जो फ्रिक्वेंसी पैदा होती है, उसका सकारात्मक असर हमारे शरीर व मन पर पड़ता है, जिससे हमें तन-मन की शांति मिलती है और हम ख़ुद को हल्का महसूस करते हैं.

  • मंत्रों से उच्चारण से रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है, बीमारियों से लड़नेवाले हार्मोंस क्रियाशील होते हैं और बीमारी उत्पन्न करनेवाले हार्मोंस कम होते हैं.

  • मंत्रों के उच्चारण से आत्मविश्‍वास बढ़ता है, मन की दुविधा दूर होती है और शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक, सामाजिक आदि समस्याओं से लड़ने की ताक़त मिलती है.

  • मंत्रों की शक्ति का प्रभाव इतना अधिक होता है कि मंत्र पढ़ने से आसपास का वातावरण शुद्ध और पवित्र होता है, मन शांत होता है और तनाव दूर होता है.

  • मंत्रों के सकारात्मक प्रभाव से हैप्पी हार्मोंस रिलीज़ होकर मस्तिष्क को सुखद अवस्था में पहुंचाते हैं, जिससे शरीर में स्फूर्ति आती है, ध्यान केंद्रित करने की शक्ति बढ़ती है और हम अपने रोज़ाना के काम और काम का प्रेशर आसानी से हैंडल कर पाते हैं.

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